नीलिमा और नीरज की कॉलेज की प्रेम कहानी

नीलिमा और नीरज की कॉलेज की प्रेम कहानी

नीलिमा और नीरज बहुत अच्छे दोस्त थे, दोनों ही कॉलेज में बीए फाइनल ईयर के स्टूडेंट थे, एक बार वे कॉलेज के शिमला टूर से वापस आ रहे थे. दोनों एक साथ बैठे  हुए थे रात के लगभग 10:00 बज चुके थे और थका हुआ होने के कारण सभी को नींद भी आ रही थी, इसीलिए बस में सभी अपनी सीटों पर आराम से बैठे हुए थे. दिसंबर का महीना था, बाहर काफी घना कोहरा हो रहा था. विजिबिलिटी कम होने के कारण बस भी धीरे-धीरे चल रही थी. लगभग 1 घंटे का सफर करने के बाद बस अचानक रुकी, ड्राइवर ने नीचे उतर कर देखा, बस का पिछला एक टायर पंचर हो चुका था, अब क्योंकि पहाड़ी रास्ता था, तो ड्राइवर ने रिस्क लेना ठीक नहीं समझा और बस को वही किनारे लगा दिया.
         नीरज पार्ट टाइम जॉब के लिए मोटर मैकेनिक की दुकान में काम करता था, अपनी पढ़ाई का सारा खर्चा वह खुद उठाता था. मैकेनिक का काम करते हुए उसे लगभग साल भर हो गया था, इस बीच उसे अपने काम का अच्छा खासा अनुभव भी हो गया था, उसने ड्राइवर के साथ मिलकर पंचर देखा और उसने ड्राइवर को आश्वासन दिया कि  वह टायर बदलवाने में उसकी मदद कर देगा.
        नीरज ने अपने दोस्तों से बात की, कि सुबह तक इंतजार करने से कोई फायदा नहीं है, इसीलिए हम सब मिलकर ही टायर चेंज कर देते हैं. बस में से सभी शिक्षकों और छात्र छात्राओं को नीचे उतरने की हिदायत दी गई.
        ठंड काफी हो रही थी तो सभी अपने अपने ब्लैंकेट और शॉल लेकर नीचे उतर गए और बस के आसपास ही टहलने लगे. नीलिमा भी बस से उतर कर नीरज के पास ही खड़ी हो गई, नीरज के दोस्तों ने मोबाइल की टॉर्च जला कर के रोशनी की और नीरज ने ड्राइवर की सहायता से महज 1 घंटे में ही टायर चेंज कर दिया. अब  सभी बस में जा कर अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए. बाहर  बहुत ठण्ड हो रही थी और ज्यादा गर्म कपड़े ना पहनने के कारण नीलिमा को ठंड लग गई. उसे जोर-जोर से छींक आने लगी, नीरज से उसकी यह हालत देखी ना गई, उसने जबरदस्ती उसे  अपनी जैकेट और गरम टोपी पहना दी और नीलिमा से सट कर बैठ गया, ताकि उसके शरीर की गर्माहट से नीलिमा को ठण्ड से थोड़ी राहत मिले.
           थोड़ी दूर चलने  को बाद एक ढाबा आया. ड्राइवर ने सभी की सलाह लेकर वहाँ बस को रोका और सभी ने वहाँ चाय कॉफी ली. नीरज भी नीलिमा  को लिए बस में ही एक स्पेशल  चाय बनवा के  ले आया. बस  में सिर्फ वे दोनों ही थे, नीरज और नीलिमा दोनों चाय पी रहे थे, ना जाने क्यों आज नीलिमा को नीरज बहुत अच्छा लग रहा था, आज दोनों पहली बार इतने करीब हुए थे,इसलिए नीलिमा को एक अलग सा एहसास हो रहा था.
            उधर नीरज भी बार  बार  नीलिमा को निहार रहा था,  पिंक कलर का सूट और उस पर नेट का दुप्पटा उसमे नीलिमा बहुत  ही प्यारी  लग  रही थी, नीरज उसकी तबीयत के बारे मे पूछता हैं, वो कहती है, की अब वह बिल्कुल ठीक है. सुबह होने वाली थी, नीरज मन मन ही मन में यह सोच रहा था कि वह नीलिमा के साथ ऐसे ही बैठे रहे क्योंकि जब वह नीलिमा के करीब बैठा था तो उसे वह पल दुनिया के सबसे हसीन पल लग रहे थे.
             सुबह होने के साथ ही सभी अपने घर पहुंच चुके थे. आज नीरज का दिल किसी भी काम में नहीं लग रहा था

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